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एआई मॉडल्स में चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ा

एआई मॉडल्स: पिन्ट्रेस्ट (Pinterest) पर हर महीने, करोड़ों लोग नए-नए स्टाइल देखने पहुंचते हैं. इसमें एक पेज है, ‘सबसे अजीबोगरीब चीज़ें’, जिस पर लोगों के लिए आइडिया भरे पड़े हैं. यह एक अमेरिकन कंपनी है लेकिन ज़्यादातर लोगों को यह अनुमान नहीं है कि इसके पीछे काम करने वाली तकनीक चीन में बनी है। पिन्ट्रेस्ट अपने रिकमंडेशन इंजन को बेहतर बनाने के लिए चीन के एआई मॉडल्स का प्रयोग कर रहा है.

अमेरिका के सैन फ़्रांसिस्को स्थित कंपनी चाहती तो बैकग्राउंड में काम करने के लिए किसी अमेरिकी एआई लैब को चुन सकती थी. लेकिन जनवरी 2025 में चीन के डीपसीक आर 1 (DeepSeek R 1) मॉडल के लॉन्च के बाद से पिन्ट्रेस्ट में चीनी एआई टेक की भूमिका बढ़ती जा रही है.

चीन के प्रयास के चलते डीपसीक ने नया एआई मॉडल लॉन्च करने की जल्दी की
चीन के प्रयास के चलते डीपसीक ने नया एआई मॉडल लॉन्च करने की जल्दी की

डीपसीक मोमेंट

चीन के एआई मॉडल्स की सबसे बड़ी सफलता का राज है, बिना रोक-टोक या प्रतिबंध के कंपनियां, ओपन सोर्स डाउनलोड करके अपनी ज़रूरत के हिसाब से कस्टमाइज़ कर सकती हैं जबकि, अमेरिका की कंपनियों, जैसे चैटजीपीटी बनाने वाली ओपनएआई, के मॉडल्स के साथ ऐसा नहीं होता.

कॉम्पनी जिन ओपन सोर्स तकनीकों से अपने इन-हाउस एआई मॉडल को ट्रेन करते हैं, वे मार्केट में मौजूद टॉप रेडीमेड मॉडल्स की तुलना में 30% ज़्यादा सटीक होते हैं और ये एआई मॉडल अमेरिकी एआई डेवलपर्स के मॉडल्स की तुलना में 90% तक सस्ते पड़ते हैं.

एआई मॉडल्स तेज़ और सस्ता

पिन्ट्रेस्ट अकेली अमेरिकी कंपनी नहीं है जो चीन की एआई तकनीक पर निर्भर है. ये एआई मॉडल्स कई फ़ार्च्यून 500 कंपनियों में तेज़ी से उपयोग किए जा रहे हैं.

ब्लूमबर्ग को एयरबीएनबी के सीईओ ब्रायन चेस्की ने बताया था कि उनकी कंपनी अपने एआई कस्टमर सर्विस एजेंट को चलाने के लिए अलीबाबा के क्वेन मॉडल पर काफ़ी हद तक निर्भर करती है.

उन्होंने इसकी तीन वजहें बताईं, ये बहुत अच्छा, तेज़ और सस्ता है.

वैसे एयरबीएनबी कई मॉडल्स का इस्तेमाल करता है जिनमें अमेरिकी मॉडल भी शामिल हैं और इन्हें कंपनी अपने ही इन्फ्रास्ट्र्क्चर में सुरक्षित तरीके से होस्ट करती है.

कम कीमत की वजह से नई स्टार्टअप कंपनियां अमेरिकी मॉडलों के बजाय चीनी एआई मॉडल्स का उपयोग ज़्यादा कर रही हैं.

अगर आप हगिंग फ़ेस पर सबसे ट्रेंडिंग मॉडल देखें- जिन्हें सबसे ज़्यादा डाउनलोड किया गया है और जिन्हें कम्युनिटी ने सबसे ज़्यादा पसंद किया है- तो आमतौर पर टॉप 10 में से कई मॉडल चीन की लैब्स के बनाए मिलते हैं.

हगिंग फ़ेस वह जगह है जहां से लोग तैयार एआई मॉडल डाउनलोड करते हैं, जिनमें मेटा और अलीबाबा जैसे बड़े डेवलपर्स के मॉडल भी शामिल हैं.

जिनमें कुछ हफ्ते तो ऐसे भी होते हैं जहाँ टॉप 5 ट्रेनिंग एआई मॉडल्स में से चार चीनी लैब्स के होते हैं.

मेटा ने अपना ओपन सोर्स लामा मॉडल 2023 में रिलीज़ किया था. डीपसीक और अलीबाबा के नए मॉडलों के आने तक इसे ऐसे डेवलपर्स की पसंद माना जाता था जो अपने हिसाब से कस्टम एप्लिकेशन बनाना चाहते थे. लेकिन पिछले साल जारी लामा4 डेवलपर्स को प्रभावित नहीं कर पाया.

ख़बरों के मुताबिक मेटा अब अलीबाबा, गूगल और ओपनएआई के ओपन सोर्स मॉडलों का इस्तेमाल करके एक नए मॉडल सेट को ट्रेन कर रहा है, जिसे जल्द रिलीज़ किया जाएगा.

चीन अब अमेरिका से आगे

2025 की शुरुआत में, आम राय यह थी कि भले ही अमेरिकी टेक कंपनियाँ अरबों डॉलर खर्च कर रही थीं, लेकिन चीनी कंपनियाँ उन्हें पीछे छोड़ने की राह पर थीं। लेकिन अब सबसे अच्छा मॉडल ओपन सोर्स मॉडल है.

चीन के एआई मॉडलों की सबसे बड़ी सफलता का राज है, बिना रोक-टोक या प्रतिबंध के कंपनियां, ओपन सोर्स डाउनलोड करके अपनी ज़रूरत के हिसाब से कस्टमाइज़ कर सकती हैं
चीन के एआई मॉडलों की सबसे बड़ी सफलता का राज है, बिना रोक-टोक या प्रतिबंध के कंपनियां, ओपन सोर्स डाउनलोड करके अपनी ज़रूरत के हिसाब से कस्टमाइज़ कर सकती हैं

स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट में पाया गया कि चीनी एआई मॉडल्स ‘या तो दुनिया के बाकी मॉडलों के बराबर पहुंच गए हैं, या फिर उनसे आगे निकल चुके हैं, चाहे बात क्षमता की हो या फिर इस आधार की कि कितने लोग उनका इस्तेमाल कर रहे हैं.

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में, ब्रिटेन के पूर्व डिप्टी प्रधानमंत्री सर निक क्लेग ने कहा कि उन्हें लगता है अमेरिकी कंपनियां ऐसी एआई के पीछे ज़रूरत से ज़्यादा भाग रही हैं जो एक दिन इंसानी इंटेलिजेंस से आगे निकल सकती हैं.

मेटा (जो लामा बनाती है) के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग ने ‘सुपरइंटेलिजेंस’ हासिल करने के लिए अरबों डॉलर लगाने का वादा किया है.

लेकिन कई विशेषज्ञ अब कहने लगे हैं कि ऐसे बड़े महत्वाकांक्षी लक्ष्य साफ़ परिभाषित नहीं हैं और इन्हीं की वजह से चीन को ओपन सोर्स एआई मॉडल्स में खुला मौका और बढ़त मिल रही है.

सर निक ने कहा, “विडंबना देखिए कि ‘दुनिया की सबसे बड़ी तानाशाही’ और ‘दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र’, यानी चीन और अमेरिका, की प्रतिस्पर्धा में चीन उस तकनीक को ज़्यादा लोकतांत्रिक बना रहा है जिसे लेकर दोनों होड़ कर रहे हैं.
स्टैनफ़ोर्ड की रिपोर्ट यह भी कहती है कि चीन के ओपन सोर्स मॉडल्स की सफलता के पीछे सरकारी समर्थन भी एक बड़ी वजह हो सकती है.

दूसरी तरफ़, अमेरिकी कंपनियां, जैसे ओपनएआई पर भारी दबाव है कि वे जल्द से जल्द राजस्व बढ़ाएं और मुनाफ़े में आएं. इसी वजह से कंपनी ने अब विज्ञापनों का सहारा लेना शुरू किया है.

ओपनएआई ने कई साल के बाद पहली बार, पिछले साल गर्मियों में दो ओपन सोर्स एआई मॉडल्स जारी किए. लेकिन पैसे कमाने के लिए कंपनी ने अपने ज़्यादातर संसाधन अपने महंगे, मालिकाना हक वाले एआई मॉडल पर लगाए हैं.

 

 

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