गेंदा (Marigold) एक बेहद लोकप्रिय, आकर्षक और आसानी से उगने वाला फूलों का पौधा है। इसका वैज्ञानिक नाम टैगेट्स (Tagetes) है और यह ‘एस्टेरेसी’ (Asteraceae) परिवार से संबंध रखता है। भारत में इसका उपयोग धार्मिक, सामाजिक उत्सवों, सजावट और माला बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
गेंदा (Marigold) की मुख्य प्रजातियाँ
भारत में मुख्य रूप से गेंदा (Marigold) की दो प्रजातियाँ उगाई जाती हैं:
- अफ्रीकन गेंदा (African Marigold): इसके पौधे ऊंचे (करीब 1.5 फीट) होते हैं और फूल बड़े आकार के पीले या नारंगी रंग के होते हैं।
- फ्रेंच गेंदा (French Marigold): इसके पौधे छोटे और घने होते हैं। इसके फूल छोटे और लाल, पीले या मिश्रित रंगों के होते हैं।
गेंदे के पौधे के लाभ
- कीट नियंत्रण: गेंदे के पत्तों और फूलों की तेज गंध प्राकृतिक रूप से हानिकारक कीटों और मच्छरों को दूर रखती है, इसलिए इसे सब्जियों के साथ लगाना अच्छा माना जाता है।
- वास्तु महत्व: घर में गेंदे का पौधा लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति मिलती है।
- व्यापार: कम लागत और कम समय (60-70 दिन में फूल आना) की फसल होने के कारण किसान इसकी खेती कर अच्छा मुनाफा कमाते हैं।
गेंदा की खेती (Marigold Farming) कैसे करें?
कई सालों से पारंपरिक खेती जैसे गेहूं, धान और गन्ने की तुलना में बागवानी और फूलों की खेती किसानों के लिए अधिक मुनाफे का सौदा साबित हो रही है. ऐसे में फूलों में गेंदा एक ऐसी सदाबहार फसल है, जिसकी मांग बाजार में साल के बारह महीने बनी रहती है. शादियों का सीजन से लेकर, दीवाली-दशहरा जैसे बड़े त्योहार, राजनीतिक कार्यक्रम और रोजमर्रा के धार्मिक अनुष्ठान सभी में गेंदे के फूलों की मांग बनी रहती है.
बाजार में इसकी लगातार रहने वाली मांग और बेहद कम समय में तैयार होने की खूबी के कारण ही इसे किसानों के लिए पीला सोना भी कहा जाता है. अगर आप भी कम जमीन, सीमित सिंचाई संसाधनों और न्यूनतम लागत के साथ भारी मुनाफा देने वाले बिजनेस की तलाश में हैं, तो गेंदे की कमर्शियल खेती आपके लिए सबसे बढ़िया ऑप्शन है. क्योंकि मात्र 3 महीने के भीतर यह फसल किसानों को इंवेस्ट की गई राशि से कई गुना अधिक मुनाफा देना शुरू कर देती है.
गेंदा की खेती
- गेंदा की खेती शुरू करने के लिए सबसे पहले आपको सही समय और सही सीजन का चुनाव करना होता है.
- इसकी खेती साल में तीन बार खरीफ (जून-जुलाई), रबी (सितंबर-अक्टूबर) और जायद (फरवरी-मार्च) के मौसम में आसानी से की जा सकती है.
- खेती की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले खेत की अच्छी तरह से दो से तीन बार जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा करना होता है और उसमें पर्याप्त मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद या केंचुआ खाद मिलाकर पाटा चलाना होता है, जिससे खेत समतल हो जाता है.
- इसके बाद आपको उन्नत किस्मों के बीजों का चुनाव करना होता है. वहीं, अधिक मुनाफे के लिए आप अफ्रीकन गेंदा (जैसे पूसा नारंगी, पूसा बसंती) या फ्रेंच गेंदा और हाइब्रिड कलकत्ती लड्डू किस्मों को चुन सकते हैं.
- इसके बाद बीज की सीधी बुआई करने के बजाय हमेशा पहले नर्सरी तैयार करनी चाहिए. जैसे एक एकड़ या बीघे के अनुपात में ऊंचे बेड बनाकर बीजों को बो दें और हल्की सिंचाई करें. फिर लगभग 25 से 30 दिनों में जब नर्सरी के पौधे 4 से 5 पत्ती वाले और करीब 10-15 सेंटीमीटर लंबे हो जाएं, तब वे मुख्य खेत में रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं. यहां इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पौधों की रोपाई हमेशा शाम के समय (धूप ढलने के बाद) करनी चाहिए जिससे पौधे मुरझाएं नहीं.
गेंदा उगाते समय इन बातों का ध्यान रखें।
- खेत में कतार से कतार और पौधे से पौधे की दूरी 45×45 सेंटीमीटर या 60×45 सेंटीमीटर रखनी चाहिए जिससे फूलों के विकास के लिए पर्याप्त जगह मिल सके.
- रोपाई के तुरंत बाद खेत में हल्की सिंचाई जरूरी करनी चाहिए. इसके साथ ही फसल की अच्छी ग्रोथ के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करके खर-पतवार नियंत्रण भी करते रहना चाहिए.
- शीर्ष कर्तन: जब पौधे रोपाई के बाद करीब 40-45 दिन बीत जाएं, तब उनके ऊपरी मुख्य सिरे को 2-3 सेंटीमीटर तोड़ देना चाहिए, जिसे कृषि विज्ञान में पिंचिंग या शीर्ष कर्तन कहा जाता है. ऐसा करने से पौधे में बगल से अधिक शाखाएं निकलती हैं और जितनी ज्यादा शाखाएं होंगी, फूल उतने ही अधिक मात्रा में आएंगे.
लागत और उत्पादन
- अनुमानित लागत: 1 बीघा खेत में बीज,नर्सरी की तैयारी,खेत की जुताई,गोबर व रासायनिक खाद (डीएपी या पोटाश),कीटनाशक,सिंचाई और फूल की तुड़ाई की मजदूरी मिलाकर लगभग 8000 से 12000 रुपये तक का खर्च आता है.
- उत्पादन: वहीं, अगर बात करें उत्पादन कि तो वैज्ञानिक और मॉडर्न तरीके से देखरेख करने पर 1 बीघे से लगभग 15 से 20 क्विंटल (1500 से 2000 किलोग्राम) तक हाई क्वालिटी वाले ताजे फूलों का उत्पादन होता है.
एक बीघे में कितना प्रॉफिट?
गेंदा फूल का बाजार भाव पूरी तरह से डिमांड और सीजन पर निर्भर करता है. आम दिनों में या ऑफ-सीजन में इसका थोक भाव 30 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम आसानी से मिल जाता है. वहीं, त्योहारों (दीवाली, दशहरा) और शादियों के सीजन के दौरान यही भाव बढ़कर 80 से लेकर 120 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाता है.
न्यूनतम औसत भाव 40 रुपये प्रति किलोग्राम भी मानकर चल जाए, तो 1 बीघे से प्राप्त 15 क्विंटल (1500 किलो) फूलों को बेचने पर कुल आमदनी 1500×40 = 60000 होती है.
इस कुल आमदनी में से अगर अधिकतम लागत 10000 रुपये को घटा भी दें, तो किसानों को मात्र 90 दिनों के भीतर 1 बीघे से 50000 रुपये का शुद्ध मुनाफा हो जाता है. वहीं, अगर आपकी फसल बिल्कुल त्योहारों के सटीक समय पर बाजार में पहुंचती है, तो यही मुनाफा 80000 से लेकर 100000 प्रति बीघा तक भी जा सकता है.
Disclaimer/अस्वीकरण: गेंदा की खेती (Marigold Farming) शुरू करने से पहले सरकारी कृषि सहायक की मदद लें, एवं उनकी सहायता और मार्गदर्शन से मिट्टी की जाँच करवाकर उचित बीज का चुनाव करें।

