हिन्दू राष्ट्र नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के शपथ लेने के मात्र 24 घंटे के भीतर वामपंथी विचारधारा वाले पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को 28 मार्च 2026 की सुबह गिरफ्तार कर लिया गया है। केपी शर्मा ओली ने सितंबर 2025 में छात्रों के हिंसक प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद हुए आम चुनाव में उनकी पार्टी को बालेन शाह की ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ से करारी हार झेलनी पड़ी थी।
ओली के जन-विरोधी सरकार
ओली की गिरफ्तारी पिछले साल (सितंबर 2025) हुए ‘Gen Z’ (जेन-जी) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और मौतों के मामले में की गई है। उन पर प्रदर्शनों को दबाने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग और आपराधिक लापरवाही (Culpable Homicide) का आरोप है, जिसके कारण 70 से अधिक छात्रों) की मौत हुई थी। ओली ने छात्रों के प्रदर्शनों को चीन की तरह तानाशाही पूर्ण तरीके के कुचलने का प्रयास किया था।
ओली को चीन समर्थक नेता के रूप में देखा जाता रहा है और चीन उनका उपयोग भारत में अस्थिरता फैलाने और सीमा विवाद भड़काने के लिए करता रहा। केपी शर्मा ओली का भारत के प्रति रवैया हमेशा ही आलोचनात्मक और विवादित रहा, उनके कार्यकाल के दौरान दोनों हिन्दू राष्ट्रों, भारत और नेपाल के संबंधों में तनाव देखा गया।
उन्होंने चीन के साथ कई व्यापारिक, सैन्य और पारगमन समझौतों पर हस्ताक्षर किए। राजनीति के जानकारों के अनुसार उन्होंने अपनी घरेलू राजनीति को मजबूत करने के लिए अक्सर “राष्ट्रवाद” का कार्ड खेला, जिसमें भारत के खिलाफ कड़े रुख को मुख्य हथियार बनाया गया।
केपी शर्मा ओली के कार्यकाल का सबसे बड़ा विवाद भारत-नेपाल-चीन त्रि-जंक्शन पर स्थित भारत के गाँव कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों को लेकर था। उनकी सरकार ने नेपाल का एक नया राजनीतिक मानचित्र जारी किया, जिसमें इन विवादित क्षेत्रों को भारत की जगह नेपाल का हिस्सा दिखाया गया। इस नक्शे को आधिकारिक मान्यता देने के लिए उन्होंने नेपाल के संविधान में संशोधन भी करवाया, जिसका भारत ने कड़ा विरोध किया था।
वामपंथी विचारधारा और चीनी मित्रता
भारत और नेपाल की साझी हिन्दू संस्कृति होने के बावजूद, ओली ने सांस्कृतिक मुद्दों पर भी भारत के साथ कई आधारहीन, तर्कहीन विवादों को जन्म दिया; जैसे उन्होंने दावा किया था कि भगवान श्रीराम की जन्म स्थली और रामराज की राजधानी असली ‘अयोध्या’ नेपाल के ‘ठोरी’ में है और भगवान राम नेपाली थे, जिससे नेपाल की जनता के साथ साथ भारत में भी हिंदुओं के धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंची। ओली ने यह भी तर्क दिया था कि योग की उत्पत्ति भारत में नही वल्कि नेपाल में हुई थी।
साल 2025 में नेपाल में हुए जेन-जी विरोध प्रदर्शनों ने देश में हो रहे भ्रस्टाचार, भाई-भतीजावाद (Nepotism), बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली के स्तर को उजागर कर दिया। प्रदर्शन का आरंभ छात्रों और युवाओं द्वारा भ्रष्टाचार और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ रोष व्यक्त करने के साथ हुआ। समय के साथ, यह आंदोलन तेज होता गया और सत्ता परिवर्तन की एक बड़ी लड़ाई बन गया था।
ओली सरकार की नीतियों और उसके कार्यकाल की कई विवादास्पद बातें इस हिंसक प्रदर्शन का कारण बनीं। युवाओं के इस समूह ने यह महसूस किया कि सरकार उनकी आवश्यकताओं और समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है। इसके परिणामस्वरूप, प्रदर्शनकारियों का समर्थन तेजी से बढ़ने लगा।
Gen Z (जेन-जी) के विरोध प्रदर्शनों क्यों हुए?
नेपाल में प्रदर्शनकारियों का नेत्रत्व इंजीनियर से गायक बने एक युवा बालेन शाह ने किया था उनकी मुख्य मांगें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, रोजगार, भाई-भतीजावाद (Nepotism), चीन को सीमा पर सैन्य संरचना बनाने अनुमति का विरोध , सस्ते चीनी समान का बेरोक-टोक आयात से गिरती अर्थव्यवस्था, बढ़ता चीनी कर्ज, देश की कार्यप्रणाली में विदेशी और राजनीतिक हस्तक्षेप को बंद करना थीं। प्रारंभ में प्रदर्शन शांतिपूर्ण चल रहा था परंतु बाद में सरकार के बल प्रयोग आदेश के यह में हिंसक हो गया, जिससे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की जान चली गई।
इस हिंसा के क्रम में बहुत से छात्र मारे गए, जो कि इस मुद्दे को और गंभीर बनाता है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया, जिसकी वजह से छात्रों की मौत हुई। इस प्रकार की घटनाएं न केवल प्रदर्शनकारियों के लिए दुःखद रही, बल्कि यह भी स्पष्ट करती हैं कि कैसे ओली सरकार ने अपने नागरिकों की आवाज़ और अधिकारों को कुचला। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने भी इस दुखद हिंसा को लेकर अपनी चिंताओं का इज़हार किया था।
प्रदर्शनों के बाद हुए चुनाव में ओली की पार्टी को एक बड़ी हार का सामना करना पड़ा। यह हार उनके देश विरोधी शासन, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं का परिणाम मानी गई.
बालेन शाह नेपाल के नये प्रधानमंत्री
27 अप्रैल 1990 को जन्मे बलेंद्र शाह, जिन्हें बालेन शाह के नाम से जाना जाता है, एक नेपाली राजनीतिज्ञ और रैपर हैं, उन्होंने 2026 के नेपाली आम चुनाव में अपनी पार्टी की शानदार जीत के बाद पदभार ग्रहण किया । इससे पहले, वर्ष 2022 से 2026 तक काठमांडू के 15वें महापौर के रूप में कार्य किया, जो इस पद को संभालने वाले पहले स्वतंत्र उम्मीदवार थे।
साल 2025 के जनरेशन जेड या जेन-जी (Gen Z) विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक प्रमुख नेता के रूप में उभरे। जनवरी 2026 में, उन्होंने नई राजनैतिक पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के आम चुनाव में पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा । उन्होंने झापा 5 में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भारी बहुमत से हराया साथ ही पूरे नेपाल में अपनी पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई।
बालेन शाह ने काठमांडू के अपने मेयर के पदभार ग्रहण करने के बाद सबसे पहले कार्यों में से एक के रूप में, नगर परिषद की बैठकों का सीधा प्रसारण शुरू किया, काठमांडू के इतिहास में पहली बार इस तरह की कार्यवाही सार्वजनिक रूप से प्रसारित की गई। उन्होंने प्रशासन की दक्षता बढ़ाने और भ्रष्टाचार के मौकों को कम करने के लिए ऑनलाइन भवन निर्माण परमिट प्रणाली और डिजिटल हस्ताक्षर शुरू करे।
ओली का कार्यकाल
ओली की गिरफ्तारी से यह स्पष्ट होता है कि नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव हो रहा है, और उन मुद्दों पर कार्रवाई की जा रही है जिन पर पहले ध्यान नहीं दिया गया था। नई सरकार की नीतियों का लक्ष्य ऐसी सुधारों को लागू करना है जो जनता की भलाई और विकास सुनिश्चित करें। यह भी देखा गया है कि ओली ने अपनी गिरफ्तारी के बाद सार्वजनिक रूप से अपनी पार्टी का समर्थन दर्शाने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक माहौल में उनकी स्थिति कमजोर होती जा रही है।
केपी शर्मा ओली ने अपने कार्यकाल के दौरान कई बार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादास्पद निर्णय लिए थे। उनके प्रधानमंत्रित्व में नेपाल ने चीन के साथ अपने संबंधों को बढ़ाया, जो भारत के लिए चिंता का विषय था। इस स्थिति में ओली की सरकार भूमिका और उनकी विदेश नीतियाँ विशेष रूप देश विरोधी मानी गई हैं।
चीन ने ओली को एक ऐसे नेता के रूप में देखा, जो भारत में अस्थिरता उत्पन्न करने में मदद कर सकता है। ओली की सरकार ने कई ऐसे कदम उठाए जो भारत-नेपाल संबंधों को तनाव में डालने का कार्य करते थे। ओली ने चीन के साथ सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए और यही राष्ट्रीय हित को दूर रख, देश में आर्थिक समस्याएँ पैदा करना उनके लिए महंगा साबित हुआ।
इस परिदृश्य में, अब बालेन शाह अपनी नई विचारधारा के साथ हिन्दू राष्ट्र नेपाल के सुनहरे भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। शाह की नई सरकार ने गठन के बाद यह संकेत दिया है कि, वे संविधान के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे।

