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किसानों को कोल्ड स्टोरेज के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देती है सरकार

भारत में हर साल बहुत बड़ी मात्रा में फल, सब्जियां और बागवानी से जुड़े उत्पाद बर्बाद हो जाते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं की कमी है. कई बार किसान मेहनत से फसल उगाते हैं, लेकिन सही समय पर बेच नहीं पाने या स्टोरेज की सुविधा न होने के कारण उन्हें नुकसान झेलना पड़ता है.

इस समस्या को कम करने के लिए सरकार ने किसानों, उद्यमियों और निवेशकों को जोड़ते हुए एक खास योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य देश में आधुनिक और बेहतर कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं को बढ़ाना है. इस योजने में सरकार 35 से 50 प्रतिशत सब्सिडी देती है.

कोल्ड स्टोरेज (Cold Storage) तापमान-नियंत्रित गोदाम होते हैं, जो फल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद, मांस और दवाओं जैसी जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं को कम तापमान पर सुरक्षित रखकर उनकी शेल्फ लाइफ (आयु) बढ़ाते हैं।

कोल्ड स्टोरेज -1°C से -24°C या उससे कम तापमान पर काम करते हैं, जिससे सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रुक जाती है और उत्पाद खराब नहीं होते।

संक्षेप में जानें,

  • तापमान नियंत्रण: -1°C से +2°C (ताजे फल-सब्जियों के लिए) और -18°C से -24°C (फ्रोजन फूड/आइसक्रीम के लिए)।
  • यह फसलों के कटाई के बाद होने वाले नुकसान को रोकता है और किसानों को सही मूल्य दिलाने में मदद करता है।
  • लाइसेंस: भारत में, राज्य-विशिष्ट कानूनों के तहत इन्हें संचालित किया जाता है जैसे, उत्तर प्रदेश कोल्ड स्टोरेज विनियमन अधिनियम, 1976।
  • सब्सिडी (Subsidy): सरकार बागवानी उत्पादों के लिए कोल्ड स्टोरेज बनाने पर 35% से 50% तक सब्सिडी देती है, जो नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) के माध्यम से मिल सकती है।
  • 10 मीटर की इकाई के लिए लगभग 500-700 वर्ग फुट जगह की आवश्यकता होती है, जिसमें 10-15 kW बिजली की खपत होती है।
  • CA (Controlled Atmosphere) स्टोरेज: इसमें तापमान के साथ गैसों (ऑक्सीजन, नाइट्रोजन) को भी नियंत्रित किया जाता है, जो फलों की ताजगी के लिए बेहतरीन है।

आइए जानते हैं कि कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी योजना क्या है और इससे किसान कैसे फायदा उठा सकते हैं.

कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें सरकार आर्थिक सहायता देती है. सामान्य क्षेत्रों में परियोजना लागत पर 35 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है. पहाड़ी, पूर्वोत्तर और अनुसूचित क्षेत्रों में यह बढ़कर 50 प्रतिशत तक हो जाती है.

वहीं अधिकतम सब्सिडी की सीमा 7.5 करोड़ तक तय की गई है. इसके अलावा कुछ आधुनिक तकनीकी उपकरणों पर भी अलग से सहायता दी जाती है.

कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर (CA) जनरेटर पर लगभग 1.25 करोड़ तक मदद, स्पेशल CA डोर पर 2.5 लाख प्रति दरवाजा तक सहायता और आधुनिक इन्सुलेशन और PLC सिस्टम जैसी तकनीकों पर भी आर्थिक सहयोग मिलता है.

कोल्ड स्टोरेज निर्माण योजना

सरकार की इस योजना का नाम कोल्ड स्टोरेज निर्माण/विस्तार/आधुनिकीकरण के लिए पूंजी निवेश सब्सिडी योजना है, जिसे नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) चलाता है.

इस योजना के तहत सरकार उन लोगों को आर्थिक मदद देती है जो नया कोल्ड स्टोरेज बनाना चाहते हैं या पुराने स्टोरेज को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करना चाहते हैं.

यह योजना सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है. इसके तहत व्यक्तिगत किसान, कंपनियां और निजी निवेशक, किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी समितियां भी लाभ ले सकते हैं. ऐसे में कोई भी व्यक्ति या संस्था जो कोल्ड स्टोरेज बनाना या सुधारना चाहती है, इस योजना का हिस्सा बन सकती है.

यह एक क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना है. इसका मतलब है कि पहले निवेशक को बैंक से लोन लेना पड़ता है और प्रोजेक्ट पूरा करना होता है. इसके बाद सरकार सब्सिडी देती है.

आवेदन और प्रक्रिया

इस योजना का फायदा लेने के लिए सबसे पहले आवेदक को कोल्ड स्टोरेज बनाने की एक पूरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करनी होती है, जिसमें उसकी लागत, डिजाइन और तकनीकी विवरण शामिल होते हैं. इसके बाद सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ आवेदन नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) को जमा किया जाता है.

आवेदन मिलने के बाद सरकार की अधिकृत तकनीकी एजेंसी उस प्रोजेक्ट की जांच करती है कि वह नियमों के अनुसार सही और व्यवहारिक है या नहीं, जब प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल जाती है, तो बैंक से लोन स्वीकृत होता है और कोल्ड स्टोरेज का निर्माण शुरू किया जाता है, निर्माण पूरा होने और यूनिट के चालू हो जाने के बाद NHB उसका अंतिम निरीक्षण करता है, और अगर सब कुछ सही पाया जाता है, तो पात्रता के अनुसार सरकार के तहत सब्सिडी जारी कर दी जाती है.

यह योजना पूरे भारत में लागू है, लेकिन कुछ क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है, जैसे पूर्वोत्तर राज्य, पहाड़ी क्षेत्र और अनुसूचित क्षेत्र. इन इलाकों में फल और सब्जियों की खेती ज्यादा होती है, इसलिए यहां कोल्ड स्टोरेज की जरूरत भी ज्यादा होती है.

 

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