11 अप्रैल 2026 को आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कंदकुर्ती गांव में श्री केशव स्फूर्ति मंदिर का लोकार्पण किया। यह मंदिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के पैतृक गांव में स्थित है, जो उनके जीवन और राष्ट्रसेवा को समर्पित एक प्रेरणा केंद्र है।
कंदकुर्ती गांव तेलंगाना के निजामाबाद जिले में गोदावरी, मंजिरा और हरिद्रा नदियों के संगम पर स्थित है।

यह श्री केशव स्फूर्ति मंदिर डॉ. हेडगेवार की स्मृति और विरासत को समर्पित एक प्रेरणा स्मारक (Sphoorthi Mandir) के रूप में बनाया गया है। यह नई पीढ़ी को राष्ट्र, समाज और धर्म के प्रति पंचपरिवर्तन की आवश्यकता और समझ के साथ उनको करने की दिशा में प्रेरित करेगा, साथ ही युवाओं को असल राष्ट्र सेवा क्या होती है इसका महत्व भी समझाएगा।
पंच परिवर्तन से राष्ट्र पुनःनिर्माण
सशक्त और विकसित राष्ट की पहचान समरसता होती है और इसी संदर्भ में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी (RSS) ने कहा है कि, पंच परिवर्तन’ केवल विचार नहीं, राष्ट्र निर्माण का आचरण है।”
‘पंच परिवर्तन’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा समाज में सकारात्मक बदलाव और राष्ट्र पुनः निर्माण के लिए पाँच प्रमुख सामाजिक आचरण-परक सुधार हैं, जो सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व-बोध और नागरिक कर्तव्यों पर केंद्रित हैं। यह विकसित भारत के लिए आत्म-अनुशासन और पारिवारिक मूल्यों को पुनः स्थापित करने पर जोर देता है।

पंच परिवर्तन क्या हैं?
- सामाजिक समरसता: जाति और वर्ग भेद को मिटाकर सभी को समान मानना, तथा मंदिर, पानी और श्मशान साझा करना।
- कुटुंब प्रबोधन: परिवार में संस्कार बढ़ाना, नियमित संवाद और संयुक्त परिवार के मूल्यों को जीवित रखना।
- पर्यावरण संरक्षण: प्लास्टिक-मुक्त जीवन, जल संरक्षण और वृक्षारोपण को अपनाना।
- स्व-बोध और स्वदेशी: अपनी भाषा, वेशभूषा, भोजन और संस्कृति पर गर्व करना तथा स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करना।
- नागरिक कर्तव्य: नियमों और कानून का पालन करना, स्वच्छता, और अनुशासन बनाए रखना।

महाराष्ट्र की सीमा से लगे तेलंगाना राज्य के निजामाबाद जिले में गोदावरी, मंजिरा और हरिद्रा नदियों के संगम पर स्थित कंदकुर्ती में डॉ. हेडगेवार के पूर्वजों का मूल स्थान होने के कारण यहाँ राष्टीयता और राष्ट्रवादी विचारों से ओतप्रोत श्री केशव स्फूर्ति मंदिर का निर्माण किया गया जिससे यह पवित्र नदिओं का संगम स्थल और भी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल बन गया है।

