दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने मुस्लिम पत्रकार राणा अय्यूब ट्वीट मामले में अहम सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर पर किए गए ट्वीट्स अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने पत्रकार राणा अय्यूब द्वारा वर्ष २०१३ से २०१७ के बीच हिन्दू देवताओं तथा वीर सावरकर के संबंध में ‘एक्स’ (ट्वीटर) पर किए गए आपत्तिजनक लेखन पर कडी आपत्ति जताई है।
न्यायालय ने ‘एक्स’ संस्था, केंद्र सरकार एवं दिल्ली पुलिस को इस लेखन के विरुद्ध संयुक्त रूप से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं । साथ ही न्यायालय ने राणा अय्यूब, एक्स, केंद्र सरकार एवं दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर उत्तर मांगा है ।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि ‘एक्स’ सोशल मीडिया पर किया गया लेखन अत्यंत अपमानजनक, उत्तेजक एवं सांप्रदायिक प्रकृति का है ।
यह सुनवाई अधिवक्ता अमिता सचदेवा द्वारा प्रविष्ट याचिका पर हो रही है । उन्होंने पहले साकेत न्यायालय में राणा अय्यूब के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की मांग की थी ।
ज्ञात हो कि, राणा अय्यूब ने वर्ष २०१३ में भगवान श्रीराम के संबंध में एक अपमानजनक टिप्पणी की थी।
वर्ष २०१५ में वीर सावरकर के बारे में विवादास्पद और अपमानजनक टिप्पणी की गई थी।
तहलका समाचार पत्र समूह के लिए एक पत्रकार के रूप में काम कर चुकी राणा अय्यूब ने इसके मुख्य संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप की हैंडलिंग के खिलाफ तहलका से इस्तीफा दे दिया था।
योजनाबद्ध तरीके से विदेशी अखबारों और संस्थानों से जुड़ी इस पत्रकार राणा अय्यूब ने देश की सेना तक के खिलाफ लिखा जिसमें एक बच्चे की तस्वीर साझा कर भारतीय सेना की आलोचना की गई थी।
तथाकथित पत्रकारों द्वारा हिंदु धर्म का विरोध और भारत विरोधी लेखन के लिए विदेशी मीडिया तथा भारत में अंग्रेजों द्वारा स्थापित राजनैतिक पार्टी एवं चीन समर्थक वामपंथी दलों द्वारा खूब वित्त-पोषण होता रहा, इस तरह के लोगों को हिन्दू विरोध और देश में एजेंडा संचालित पत्रकारिता के लिए विदेशों में स्थित एंटी-इंडिया समूहों द्वारा सम्मानित भी किया जाता रहा है।
दिल्ली उच्च न्यायालय में पत्रकार राणा अय्यूब द्वारा हिन्दू देवताओं तथा वीर सावरकर के संबंध में ‘एक्स’ (ट्वीटर) पर किए गए आपत्तिजनक लेख संबंधी इस प्रकरण की अगली सुनवाई १० अप्रैल को होगी ।

