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मिलिट्री स्लीप मेथड: नींद तकनीक कितनी सही और स्वास्थ्य पर प्रभाव

मिलिट्री स्लीप मेथड एक विशेष तकनीक है, जिसे तेजी से नींद में जाने के लिए विकसित किया गया है। मूल रूप से, यह तकनीक अमेरिकी सेना द्वारा उपयोग की जाती थी, ताकि सैनिक युद्ध क्षेत्र में या अन्य तनावपूर्ण परिस्थितियों में शीघ्रता से विश्राम कर सकें। इस तकनीक का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक स्थिति को संतुलित करना है, ताकि व्यक्ति प्रभावी ढंग से ठीक से सो सके, भले ही वह वातावरण कितना भी परिवर्तित क्यों न हो।

इस तकनीक का विकास उस समय किया गया जब सैनिकों को कठोर और अत्यधिक चुनौतीपूर्ण स्थितियों में नींद की आवश्यकता थी। हवा, ध्वनि, और अन्य बाहरी तनावों के प्रभाव को कम करने के लिए इस तकनीक को अमेरिका के एक ट्रैनिंग स्कूल में विकसित किया गया था। इस प्रक्रिया से सैनिकों को शारीरिक तनावों को नियंत्रित करके गहरी नींद में जाने में मदद मिलती है।

मिलिट्री स्लीप मेथड कैसे अपनाएं?

मिलिट्री स्लीप मेथड, जिसे सैन्य निद्रा तकनीक भी कहा जाता है, यह अमेरिकी सेना में नींद के लिए एक प्रभावी तकनीक है जिसका उद्देश्य 2 मिनट के भीतर नींद में जाने में मदद करना है। इस विधि से बैरकों या युद्ध के समय बेहतर नींद पाने में मदद मिलती हैं।

लॉयड ‘बड’ विंटर ने दावा किया था कि छह हफ्ते तक यह तरीका अपनाने से पायलट किसी भी समय, किसी भी हालत में दो मिनट में सो सकते हैं. उनके अनुसार मिलिट्री स्लीप मेथड करने के लिए,

  • सिर, जबड़े और चेहरे को बारी-बारी से ढीला छोड़ें, साथ में धीरे-धीरे गहरी सांस लें।
  • कंधों को ढीला छोड़ते हुए गहरी सांस लें और छोड़ें।
  • पूरे हाथ को बिस्तर पर ढीला छोड़ दें, बाइसेप्स से शुरू करके कोहनी, कलाई और हाथ तक. दूसरे हाथ के साथ भी ऐसा ही करें।
  • पैरों को ढीला छोड़ें, जांघ से लेकर टखने तक. दूसरा पैर भी इसी तरह ढीला छोड़ दें।
  • अब दिमाग को शांत रखें, किसी विषय पर चिंतन न करें, किसी शांत तस्वीर की कल्पना करें – जैसे वसंत का कोई दिन या शांत झील का दृश्य.
    ज़रूरत पड़े तो “मत सोचो” जैसा वाक्य दोहराएं और कम से कम 10 सेकंड तक दूसरी सोच को रोकें.

नींद तकनीक कितनी प्रभावी है?

मिलिट्री स्लीप मेथड एक प्रभावी नींद तकनीक है जिसको कई अन्य नींद सुधार विधियों के मुकाबले अपनाना आसान है। सैनिकों और आज-काल की व्यस्त दिनचर्या में इसकी सफलता का प्रमुख कारण है इसे सरलता से किया जाना। इस तकनीक का उद्देश्य शीघ्रता से नींद में जाना है, विशेषकर उन परिस्थितियों में जब अल्प समय में विश्राम की आवश्यकता होती है।

इस तकनीक का आधार वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर है, जिसमें तनाव को कम करने और शरीर को आराम देने के लिए कुछ विशेष प्रक्रियाएँ शामिल की जाती हैं। सबसे पहले, यह तकनीक विभिन्न शारीरिक संकेतों को सक्रिय करने के आधार पर कार्य करती है। उदाहरण के लिए, गहरी सांस लेने की तकनीक से शरीर को विश्राम की स्थिति में लाया जा सकता है। इसके बाद, मस्तिष्क को शांत करने और अनावश्यक विचारों को समाप्त करने के लिए एक सरल मानसिक अभ्यास किया जाता है।

मिलिट्री स्लीप मेथड की प्रभावशीलता का एक और कारण है कि, यह विधि केवल 120 सेकंड यानि 2 मिनिट में व्यक्ति को नींद में ले जा सकती है। यह मीडिया और तकनीक से भरे आधुनिक युग में एक महत्वपूर्ण विशेषता है।

शरीर के स्वास्थ्य पर प्रभाव

सैनिकों के अलावा अन्य लोगों द्वारा इस तकनीक के इस्तेमाल पर विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इतनी जल्दी नींद आने की उम्मीद करना सोने की कोशिश को खराब कर सकता है. उनके अनुसार, 2 मिनट में नींद में जाने का दावा, स्वास्थ के लिए नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है। अमेरिकी सैनिकों के बारे में पता है जो यह तरीका इस्तेमाल करते हैं। लेकिन सैनिकों की नौकरी शारीरिक तौर पर बहुत थकाने वाली होती है, इसलिए उनमें से कुछ मिनटों में सो जाते हैं।

सामान्यतः किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को सोने में औसतन 5 से 20 मिनट लगते हैं, इसलिए सिर्फ़ 2 मिनट में सोने की कोशिश चिड़चिड़ापन या अन्य कोई मानसिक परेशानी का कारण भी हो सकता है।

जल्दी सोने के लिए कुछ आसान सुझाव हैं जिनका उपयोग हम कर सकते हैं:

• हर दिन एक ही समय पर उठें, इससे नींद खुलने का समय तय हो जाता है और रात को सोने का टाइम भी फिक्स हो जाएगा.
• दिन में झपकी न लें, क्योंकि इससे रात को नींद काम आती है.
• तब तक बिस्तर पर न जाएं जब तक नींद न आए. अगर शरीर तैयार नहीं है तो आप लंबे समय तक लेटे रहेंगे. इसलिए शाम को बैठिए, अपना समय एंजॉय कीजिए, जब आँख लगने लगे तभी बिस्तर पर जाएं.

आमतौर पर सात से आठ घंटे की नींद को ज़रूरी माना जाता है कि लेकिन कुछ जानकार मानते हैं कि हर व्यक्ति के लिए सही नींद की अवधि अलग-अलग होती हैं. जैसे कुछ को सात-आठ घंटे से ज़्यादा नींद चाहिए, कुछ को कम, हर व्यक्ति को अपनी ज़रूरत और स्वस्थ रहने के की आवश्यकता के हिसाब से सोना चाहिए।

सैनिकों की नींद का तरीका क्यों उपयोगी हो सकता है?

वास्तविकता में “मिलिट्री स्लीप मेथड” की तकनीक  की शारीरिक या मानसिक प्रक्रिया में ‘मिलिट्री’ से जुड़ा कुछ भी नहीं है। और यह तरीका पूरी तरह गलत भी नहीं है, क्योंकि मांसपेशियों को ढीला करने और सांस लेने की तकनीक से शरीर तनावमुक्त हो जाता है। जिस तरह से एक ही रूम या बैरक में कई सैनिकों का साथ में  सोना बेहद मुश्किल होता है। इसलिए सैनिकों की आंखों पर मास्क होता है, कान में प्लग लगा होता है।

इस तरह कठिन परिस्थितियों मे सैनिकों द्वारा नींद के लिए इस्तेमाल होने वाले तरीके भी आज की व्यस्त और व्यावसायिक जिंदगी में जरुरतमन्द  लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं.

शारीरिक या तनाव वाली वाली ड्यूटी पर रहने वालों को सलाह दी जाती है कि जब मौक़ा मिले तो छोटी नींद या “टैक्टिकल नैप” अवश्य लें जिससे शरीर पुनः तरोताजा महसूस कर सकेगा। सैनिकों की तरह मिलिट्री स्लीप मेथड से नींद का रूटीन बनाने से दिमाग़ को संकेत मिलता है कि अब आराम का समय है, जिससे नींद जल्दी आती है। रूटीन बनाने और डिस्ट्रैक्शन कम करने में अनुशासन का अहम योगदान होता है. इसकी शुरुआत करने के लिए, हर रात ठीक एक ही समय पर बिस्तर पर जाएं, अपना फोन बंद कर दें और किताब पढ़ें। फिर जब नींद आने लगे या कहें “आँख लगने लगे” तो लाइट बंद कर सो जाएं। अगर रोज ऐसा करते रहें तो सोने में कोई दिक़्क़त नहीं होगी.

 

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