आर्टेमिस मिशन, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा संचालित एक महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन है, जिसका लक्ष्य चंद्रमा पर अमेरिकी मानव का पुनः पहुंचना है। आर्टेमिस II मिशन के रॉकेट ने फ़्लोरिडा के केप कैनावेरल स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी. और सुरक्षित चंद्रमा की कक्षा में पहुँच गया।
आर्टेमिस मिशन क्या है?
आर्टेमिस II (2026) चंद्रमा के चारों ओर एक क्रू मिशन है, जबकि आर्टेमिस III का लक्ष्य दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग है, जिसका उद्देश्य वहां एक स्थायी आधार स्थापित करना और मंगल ग्रह के लिए इंसानों को तैयार करना है।
10 दिन के आर्टेमिस 2 मिशन में अंतरिक्षयात्री चांद की सतह पर उतरेंगे नहीं, बल्कि इस योजना में वे मून का चक्कर लगाते हुए पृथ्वी से उतनी दूर जाएंगे जहां पर आज तक कोई नहीं गया है. यह यात्रा आगे चलकर चंद्रमा पर उतरने और वहां एक बेस बनाने का रास्ता तैयार करेगी.
इस मिशन में तीन अमेरिकी अंतरिक्षयात्री रीड वाइसमैन, क्रिस्टीन कोच, विक्टर ग्लोवर और कनाडाई अंतरिक्षयात्री जेरेमी हेनसेन शामिल हैं. इस मिशन में विशेष रूप से चंद्रमा पर जाने वाली पहली महिला अंतरिक्ष यात्री भी है।
इस मिशन का नाम ग्रीक पौराणिक कथा की देवी आर्टेमिस के नाम पर रखा गया है, जो चंद्रमा की देवी मानी जाती हैं। आर्टेमिस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा पर स्थायी उपस्थिति स्थापित करना और फिर मंगल पर मानवीय मिशनों का मार्ग प्रशस्त करना है।
नासा का आर्टेमिस कार्यक्रम हजारों वैज्ञानिकों और अन्य लोगों की कई सालों की मेहनत का बाद पूरा हुआ है और इसका बजट करीब 100 अरब डॉलर का हैं.

50 साल बाद चंद्रमा की याद फिर क्यों आई?
पचास से अधिक साल के बाद नासा का चंद्रमा को लेकर ‘आर्टेमिस’ पहला मिशन शुरू हुआ है यह मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण एवं चंद्रमा पर स्थाई मानव बेस बनाने के लिए पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराने के उदेश्य से शुरू किया गया था।
आर्टेमिस मिशन के दौरान, नासा ने नए रॉकेट और अंतरिक्ष यान का उपयोग किया, जिसमें आर्टेमिस I, आर्टेमिस II और आर्टेमिस III जैसे अभियान शामिल हैं। आर्टेमिस I अभियान, जो कि पहला परीक्षण उड़ान था, का उद्देश्य ओरियन स्पेसक्राफ्ट की विश्वसनीयता स्थापित करना था।
वैसे तो चंद्रमा की सतह देखने में सूखी और धूल भरी लगती है, लेकिन विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के अनुसार, असल में उस सतह पर वही तत्व मौजूद हैं जो हमें धरती पर मिलते हैं. जैसे दुर्लभ धातुएं (रेयर अर्थ एलिमेंट्स), जो धरती पर बहुत कम पाए जाते हैं, चंद्रमा के कुछ हिस्सों में भारी मात्रा में मौजूद हों और उनका खनन करके पृथ्वी पर लाया जा सके।

इनमें लोहे और टाइटेनियम जैसी धातुएं और हीलियम, जिसका उपयोग सुपरकंडक्टर से लेकर मेडिकल उपकरणों तक, कई चीज़ों में होता है. इसके अलावा सबसे महत्वपूर्व जानकारी में से एक, खनिजों में पानी पाए जाने के संकेत मिले हैं, ध्रुवों पर भी पानी की अच्छी ख़ासी मात्रा मौजूद है. वहां ऐसे गड्ढे हैं जो हमेशा छाया में रहते हैं, जहां बर्फ़ जमा हो सकती है.
अगर मानव चांद पर बस्ती बना कर रहना चाहते हैं, तो पानी तक पहुंचना बेहद ज़रूरी है. यह न सिर्फ़ पीने के काम आता है, बल्कि इसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़कर सांस लेने की हवा तैयार की जा सकती है, और यहां तक कि अंतरिक्ष यानों के लिए ईंधन भी बनाया जा सकता है.
चंद्रमा पर दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) के लिए प्रतिस्पर्धा
अमेरिका के अपोलो मिशन सोवियत संघ के साथ अंतरिक्ष में आगे होने की होड़ का नतीजा थे, लेकिन इस बार मुक़ाबले में चीन है. चीन अंतरिक्ष तकनीक में काफी उन्नत है और चंद्रमा पर रोबोट तथा रोवर सफलतापूर्वक उतार चुका है, उसका अगला कदम इंसानों को पहुंचना है, चीन का कहना है कि वह 2030 तक इंसानों को भी वहां पहुंचा देगा।
चंद्रमा की सतह पर अमेरिका और चीन, दोनों ही उन इलाक़ों पर कब्जा करना चाहते हैं जहां खनिज और अन्य संसाधन सबसे ज़्यादा हैं. लेकिन संयुक्त राष्ट्र की 1967 की आउटर स्पेस संधि कहती है कि कोई भी देश चांद का मालिक नहीं बन सकता। चांद पर खनिजों के मामले में इस संधि की मान्यता कितनी कारगर होगी यह तो समय ही बताएगा।

नई पीढ़ी को प्रेरणा
1960 और 1970 के दशकों में अपोलो मिशनों से भेजी गई अस्पष्ट तस्वीरों ने अंतरिक्ष में जाने के सपने को हक़ीक़त में बदल दिया था. इससे प्रेरित होकर भले ही सिर्फ़ कुछ लोग ही आगे चलकर अंतरिक्ष यात्री बन पाए हों, लेकिन बहुत से लोगों ने विज्ञान, तकनीक और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना करियर चुना.
इसी तरह आर्टेमिस मिशन, जिसे लाइव और 4के रेज़्योल्यूशन में दिखाया जाएगा, वो एक नई पीढ़ी को अंतरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्र में रिसर्च के लिए प्रेरित करेगा.
तेजी से बढ़ती अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, अमेरिका को आर्टेमिस पर खर्च किए गए अरबों डॉलर से कई गुना अधिक व्यापारिक लाभ करवाएंगे. इन मिशनों के लिए विकसित की गई तकनीक से बनी चीज़ें यहाँ भी व्यवसाय तौर पर काम आ सकेंगी।
आर्टेमिस मिशन की मुख्य विशेषता इसकी उच्च प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष यात्रा की रणनीतियाँ हैं। इस मिशन के लिए, Space Launch System (SLS) रॉकेट का उपयोग किया जाएगा, जो एक शक्तिशाली रॉकेट है, जिसे विशेष रूप से आर्टेमिस कार्यक्रम के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह रॉकेट न केवल भारी मात्रा में कार्गो और अंतरिक्षयात्री ले जाने में सक्षम है, बल्कि चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश की क्षमता भी रखता है।

आर्टेमिस मिशन के तहत, नासा चाँद पर लंबे समय तक रहने के लिए मानव बस्तियों की योजना बना रहा है। इस मिशन की तैयारी में विशेष रूप से मुख्य ध्यान उस स्थायी आधार की स्थापना पर है, जिसे चाँद के दक्षिणी ध्रुव के निकट स्थापित किया जाएगा।
यह आधार, जिसे आर्टेमिस बेस कैंप या गेटवे कहा जाता है, वैज्ञानिक अध्ययन और अनुसंधान के लिए एक केंद्र के रूप में काम करेगा। इस स्थान पर पानी, हाइड्रोजन, और अन्य संसाधनों का अन्वेषण किया जाएगा, जिससे चाँद पर दीर्घकालिक मानवीय उपस्थिति बनाए रखने में सहायता मिलेगी। इसके अलावा, चाँद पर मानव बस्ती की संभावनाएँ एक नई वैज्ञानिक जांच का द्वार खोलेंगी, जिससे अंतरिक्ष विज्ञान, ग्रह भूविज्ञान, और चिकित्सा विज्ञान में नई ऊँचाइयों को छूने की उम्मीद है।

