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नेपाल में हिन्दू राष्ट्र और राजशाही को लेकर हुए प्रदर्शन आरपीपी के नेता का पासपोर्ट कैंसिल

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में हिन्दू राष्ट्र और राजशाही को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में वहां की चीन समर्थित वामपंथी सरकार एक्शन में लग रही है इसी क्रम में काठमांडु में एक अफवाह चली कि राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) के दो वरिष्ठ नेताओं सांसद धवल शमशेर राणा और रवींद्र मिश्रा के खिलाफ देशद्रोह का केस चलाया जा सकता है। हालांकि, इसकी पुष्टि तो अभी तक नहीं हुई, लेकिन इन दोनों ही नेताओं के पासपोर्ट को कैंसिल कर दिया गया है। इनके देश छोड़ने पर रोक लगा दी गई है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, राणा और मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें काठमांडू जिला अदालत की जज तारादेवी महारजन ने पांच दिनों के लिए पुलिस की कस्टडी में भेज दिया है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों नेताओं के खिलाफ देश के खिलाफ किए गए अपराधों के तहत केस चलाने की इजाजत दे दी है।

राजा ज्ञानेंद्र शाह का पासपोर्ट रद्द करने की उठी मांग

शमशेर राणा और मिश्रा के पासपोर्ट को रद्द किए जाने के बाद आरोप लगाया जा रहा है कि नेपाल में विरोध प्रदर्शन और हिंसा के लिए पूरी तरह से राजा ज्ञानेंद्र शाह जिम्मेदार हैं। नेपाल की संसद में वामपंथी पार्टियां और राजशाही विरोधी दलों नें राजा ज्ञानेंद्र शाह का भी पासपोर्ट रद्द करने की मांग की है। वामपंथी पार्टी को सपोर्ट करने वाले राष्ट्रीय जनमोर्चा की सांसद चित्रा बहादुर केसी का कहना है कि गणतंत्र की रक्षा करने के लिए ये आवश्यक हो गया है कि पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की भूमिका की भी जांच हो।

राणा की बेटी ने लगाए गंभीर आरोप

इस बीच RPP नेता शमशेर राणा की बेटी शिवांगिनी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए पासपोर्ट जब्त किए जाने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि इस सभा का नेतृत्व किसी और ने किया था, मेरे पिता शमशेर राणा को इसके समर्थन के लिए बुलाया गया था। शिवांगिनी के अनुसार, उन्हें जैसे ही भाषण देने के लिए मंच आमंत्रित किया गया और वो मंच पर पहुंचे ही थे कि अचानक से आंसू गैस का गोला मंच पर आकर गिरा। हर कोई वहां से भाग गया। वे निहत्थे सड़क के बीच में खड़े थे।

मेरे पिता ने किया था विदेशी प्रभाव का विरोध

शिवांगिनी राणा का कहना है कि मेरे पिता उन सांसदों में से एक हैं, जिन्होंने नेपाल में विदेशी प्रभावों का खुले तौर पर विरोध किया था। उन्होंने ही नेपाल में धर्मान्तरण और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देने के लिए देश में आने वाले 100 मिलियन डॉलर से अधिक का विरोध किया था। वो हिन्दू राष्ट्र का समर्थन करते हैं। इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

 

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