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यूक्रेन रूस वार्ता: पश्चिमी तमाशबीन देशों ने माना पुतिन से युद्ध जीतना असंभव?

यूक्रेन रूस वार्ता: रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को शुरू हुए 3 साल से अधिक का समय हो गया है और यूक्रेन ने जिन मददगारों की सलाह पर युद्ध शुरू किया था वह सभी अब मुँह फेर रहे हैं। आर्थिक और सैन्य सहयोगी पश्चिमी देश भी इस युद्ध के इतना लंबा होने की उम्मीद नहीं रखते थे.

यूक्रेन को अमेरिका और कुछ यूरोप के देश पहले ही और सहायता के लिए न कर चुके हैं, जबकि अन्य देशों की स्वयं की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है तो इन परिस्थितियों में उनका बैक आउट करना जायज भी है, और वैसे भी पश्चिमी देश तमाशबीन बनने की शौकीन माने जाते है।

इस सब कारणों से ही यह वार्ता शायद संभव हो रही है. इसके लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का बयान भी  आया है। जिसमें उन्होंने मंगलवार को कहा कि रूस के साथ 3 साल से अधिक समय से यूक्रेन जंग लड़ रहा है। उन्हें पहली बार पुतिन के आमने-सामने होकर वार्ता का इंतजार है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बारे में आमने-सामने बातचीत करने के लिए इस सप्ताह तुर्की की राजधानी अंकारा में वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का आखिरी पल तक इंतजार करेंगे।

ज्ञात हो रूस में विक्ट्री डे परेड से पहले, रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने जेलेंस्की को 15 मई के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध पर बिना किसी पूर्व शर्त के वार्ता का ऑफर दिया था, जिसे जेलेंस्की ने स्वीकार कर लिया था।

अब जबकि जेलेंस्की तुर्की पहुंचने वाले हैं, रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अभी तक यह नहीं बताया है कि वह वार्ता में शामिल होंगे या नहीं,

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच युद्ध रोकने के अमेरिका के प्रयासों के तहत दोनों पक्षों से एक तटस्थ स्थान पर वार्ता में शामिल होने का आग्रह किया था।

अगर इस वार्ता में पुतिन खुद शामिल होते हैं तो युद्ध शुरू होने के बाद यह पुतिन और जेलेंस्की के बीच पहली आमने-सामने की बैठक होगी।

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने राजधानी कीव में संवाददाताओं से कहा कि वह वार्ता करने के लिए बृहस्पतिवार को अंकारा में होंगे। उन्होंने कहा कि वह तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन से मिलने की योजना बना रहे हैं और वे दोनों पुतिन के आने का इंतजार करेंगे।

जेलेंस्की ने कहा कि यदि पुतिन बैठक के लिए इस्तांबुल को चुनते हैं, तो दोनों नेता वहां जाएंगे।

इस वार्ता पर पूरे विश्व की नजर है क्योंकि दोनों ही युद्धरत देश यूक्रेन और रूस 3 साल के सतत संघर्ष के कारण अब  आर्थिक, सामाजिक, सैनिकों की मानसिक जटिलता और संसाधनों की कमी जैसी विषम परिस्थित से गुजर रहे हैं और किसी न किसी बहाने से युद्ध रोकना चाहते है. दोनों ही देश इस मौके को सही मान कर मिलने का विचार कर रहे है।

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