हिन्दू धर्म के आराध्य देवी-देवताओं के दुनिया में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं हैरान कर देती हैं। ऐसा ही एक मंदिर भारत भूमि के मध्य में स्थित वन प्रदेश में भी है। ‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के गरियाबंद जिले के मोहेरा (धमतरी सीमा के पास) में स्थित निरई माता मंदिर एक अत्यंत रहस्यमयी और अनोखा सिद्धपीठ है, यह साल में सिर्फ एक बार चैत्र नवरात्रि के पहले रविवार को सुबह 4 बजे से 9 बजे (5 घंटे) के लिए खुलता है।
छत्तीसगढ़ में निरई माता मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था और श्रद्धा है। यहाँ माता के दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ती है, वहीं निरई माता मंदिर से जुड़ी मान्यताएं भी बेहद अनोखी हैं। जिसमें से एक आपको जानकर हैरानी कर देने वाली मान्यता है और वह है, इस निरई माता मंदिर में महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित है।
रहस्यपूर्ण ज्योत प्रज्वलित होना
छत्तीसगढ़ में धमतरी के मगरलोड क्षेत्र में घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित निरई माता मंदिर भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। दुर्गम रास्तों और उबड़-खाबड़ पहाड़ियों पर स्थित होने के बाद भी भक्त यहां पर दर्शन के लिए आते हैं।
इस मंदिर में भक्त देवी मां को नारियल, नींबू और अगरबत्ती भेंट करते हैं। माना जाता है कि इससे मां प्रसन्न होती हैं और जातक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
बता दें कि निरई माता का मंदिर बेहद रहस्यमयी और अनोखा सिद्धपीठ है। यहां पर साल में सिर्फ एक बार यानी कि चैत्र नवरात्रि के पहले रविवार पर सुबह 4 से 9 बजे यानी की मात्र 5 घंटों के लिए खुलता है। सीमित समय के लिए मंदिर खुलने की वजह से भक्तों की मंदिर में भारी भीड़ उमड़ती है।
इस मंदिर में मां की मूर्ति स्थापित नहीं है, बल्कि एक पवित्र गुफा में ज्योत प्रज्वलित होती है। इस ज्योति को लेकर मान्यता है कि नवरात्रि के पावन मौके पर यह ज्योति बिना घी, तेल और माचिस के अपने आप प्रज्वलित हो जाती है।
महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित
अगर निरई माता मंदिर से जुड़ी मान्यताओं की बात की जाए, तो महिलाओं का इस मंदिर में प्रवेश पूरी तरह से वर्जित है। इस मंदिर में सिर्फ पुरुष ही पूजा-पाठ कर सकते हैं। इसके पीछे एक पुरानी किवदंती भी मिलती है। जिसके अनुसार प्राचीन काल में पहाड़ियों के बीच एक बैगा पुजारी मां निरई की श्रद्धा और सच्चे मन से सेवा करता है, जिससे देवी मां अति प्रसन्न थीं।
देवी मां स्वयं पुजारी को भोजन कराती थीं। लेकिन इससे पुजारी की पत्नी के मन में संदेह पैदा हो गया। इस बात से देवी बेहद क्रोधित हो गईं और उन्होंने यह आदेश दिया कि भविष्य में कोई भी स्त्री, निरई माता मंदिर में उनका दर्शन नहीं करेगी। तभी यह मान्यता चली आ रही है कि महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित है।
