यदि आपका पेट स्वस्थ नहीं है, तो शरीर में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
• पेट की समस्याएं: लगातार गैस बनना, पेट फूलना (Bloating), कब्ज (Constipation) या दस्त होना।
• थकान और नींद की कमी: बिना वजह थकान महसूस होना और सोने में परेशानी आना।
• त्वचा की समस्याएं: चेहरे पर मुंहासे या अन्य त्वचा संबंधी दिक्कतें
• मूड में बदलाव: तनाव, चिंता या चिड़चिड़ापन बढ़ना (क्योंकि खुशी का हार्मोन ‘सेरोटोनिन’ काफी हद तक पेट में ही बनता है)
हमने अपने आसपास के कई लोगों को अक्सर “आज पेट ठीक नहीं लग रहा।” , “कुछ भी खाता हूं तो गैस बन जाती है।” ऐसा कहते हुए सुना होगा। कई बार इसकी वजह बिगड़ती गट हेल्थ होती है। हमारी आंतों में खरबों बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीव रहते हैं, जिन्हें ‘गट माइक्रोबायोम’ कहते हैं।
ये सूक्ष्मजीव भोजन को पचाने, पोषक तत्वों को शरीर तक पहुंचाने, इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने और शरीर के कई जरूरी कामों में अहम भूमिका निभाते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हमारी लगभग 70% इम्यूनिटी का संबंध आंतों से है।
हमारी रोज की थाली का गट हेल्थ पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। हम जो कुछ भी खाते हैं, वह आंतों में रहने वाले इन सूक्ष्मजीवों को भी प्रभावित करता है। कुछ फूड्स अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं और गट माइक्रोबायोम को मजबूत बनाते हैं। वहीं कुछ फूड्स इनका संतुलन बिगाड़ सकते हैं। इससे पाचन संबंधी कई समस्याओं का रिस्क बढ़ जाता है।
गट हेल्थ को बेहतर बनाने के आसान उपाय
पेट को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए आप अपनी जीवनशैली में ये बदलाव कर सकते हैं:
1. फाइबर से भरपूर भोजन लें: अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, दालें और साबुत अनाज शामिल करें।
2. प्रोबायोटिक्स और फर्मेंटेड फूड्स: दही, छाछ, कांजी या किमची जैसी चीजों का सेवन करें। इनमें अच्छे बैक्टीरिया होते हैं जो पेट के माइक्रोबायोम को संतुलित करते।
3. पर्याप्त पानी पिएं: दिनभर में खूब पानी पीने से पाचन क्रिया सुचारू रूप से काम करती है और पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है।
4. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से बचें: ज्यादा चीनी, मैदा, पैकेटबंद स्नैक्स और तली-भुनी चीजों का सेवन कम से कम करें, क्योंकि ये पेट के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं।
5. चबा-चबाकर खाएं: भोजन को धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाने से पेट फूलने और गैस जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
आईए, हम यहाँ आगे इस संबंध में सामान्य भाषा में बिंदुबार इसके बारे में और जानते हैं,
- पेट की सेहत (गट हेल्थ) दुरुस्त रहने का क्या मतलब है?
इसका मतलब डाइजेस्टिव सिस्टम के सही तरीके से काम करने और आंतों में मौजूद गट माइक्रोबायोम के संतुलन से है। इसके संतुलन से-
- भोजन का पाचन बेहतर होता है।
- शरीर पोषक तत्वों को सही ढंग से अवशोषित कर पाता है।
- इम्यूनिटी मजबूत बनी रहती है।
- कैसे पता चलता है कि पेट की सेहत खराब हो रही है?
जब आंतों में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ता है तो खाना पचाने और शरीर में पोषक तत्वों को पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं।
- लंबे समय तक लगातार पेट खराब रहे तो इससे क्या नुकसान होता है?
लंबे समय तक पेट खराब रहने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इससे कमजोरी बढ़ सकती है और इम्यूनिटी पर भी असर पड़ सकता है।
- पेट दुरुस्त रखने के लिए क्या करना चाहिए?
आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया को वैराइटी पसंद होती है। इसलिए रोज अलग-अलग तरह के फल-सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर रिच फूड खाने चाहिए। छोटी-छोटी स्वस्थ आदतें लंबे समय में गट हेल्थ को मजबूत बनाती हैं।
- कौन-से फूड्स पेट में गुड बैक्टीरिया बढ़ाते हैं?
दही और छाछ जैसे फर्मेंटेड फूड्स अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने में मदद करते हैं, जबकि फल-सब्जियां, दालें और साबुत अनाज उन्हें पोषण देते हैं। इसलिए गट हेल्थ बेहतर रखने के लिए रोज अलग-अलग तरह की पौष्टिक चीजें खाना जरूरी है।
- कौन-से फूड्स गुड बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं?
कुछ फूड्स गुड और बैड बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ सकते हैं। खासकर ऐसे फूड्स, जिनमें रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, एक्स्ट्रा शुगर, अनहेल्दी फैट और आर्टिफिशियल एडिटिव्स ज्यादा होते हैं।
- चीनी गुड बैक्टीरिया को कैसे नुकसान पहुंचाती है?
डाइट में चीनी की मात्रा ज्यादा होने से आंतों में मौजूद बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ने लगता है। इससे कुछ बैड बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं, जबकि गुड बैक्टीरिया की संख्या घट सकती है। समय के साथ यह बदलाव गट बैरियर को कमजोर करता है और शरीर में सूजन बढ़ा सकता है। यही वजह है कि लंबे समय तक ज्यादा चीनी खाने से गट हेल्थ खराब होती है।
- क्या बार-बार एंटीबायोटिक लेने से पेट के गुड बैक्टीरिया खत्म हो सकते हैं?
एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया को मारने के लिए बनाई जाती हैं। लेकिन वे हमेशा गुड और बैड बैक्टीरिया में फर्क नहीं कर पातीं। बार-बार या बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने पर गट में मौजूद गुड बैक्टीरिया की संख्या और वैराइटी दोनों कम हो सकती है। इसलिए एंटीबायोटिक्स हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए।
- क्या पेट के बैक्टीरिया हमारी भूख और क्रेविंग्स को कंट्रोल कर सकते हैं?
हां, गट माइक्रोबायोम भूख और फूड चॉइस को प्रभावित कर सकते हैं। आंतों में मौजूद बैक्टीरिया ऐसे हार्मोन्स और सिग्नल बनाते हैं, जो गट और ब्रेन के बीच कम्युनिकेशन में भूमिका निभाते हैं। ये सिग्नल पेट भरने का एहसास, भूख और कुछ खास चीजें खाने की इच्छा को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि क्रेविंग्स सिर्फ गट बैक्टीरिया से तय नहीं होतीं। इसमें आदतें, नींद, हार्मोन और आसपास का माहौल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- क्या स्ट्रेस भी गट हेल्थ को प्रभावित करता है?
हां, स्ट्रेस और गट हेल्थ का दो-तरफा रिलेशन है। जब हमारा ब्रेन और आंतें लगातार एक-दूसरे को सिग्नल भेजते हैं। इसे ‘गट-ब्रेन एक्सिस’ कहा जाता है।
जब तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो शरीर में कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं। ये हार्मोन आंतों के सामान्य कामकाज और वहां मौजूद सूक्ष्मजीवों के वातावरण को प्रभावित करते हैं।
यही वजह है कि मानसिक तनाव का असर अक्सर पेट पर भी दिखाई देता है।
- फूड के अलावा कौन-सी आदतें गट हेल्थ को खराब करती हैं?
हमारी रोजमर्रा की कई आदतें भी गट माइक्रोबायोम के संतुलन को प्रभावित करती हैं। विशेषकर, खराब नींद, लगातार स्ट्रेस, फिजिकल इनएक्टिविटी इत्यादि , यही वजह है कि अच्छी गट हेल्थ के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल भी जरूरी है।
- पेट को हेल्दी रखने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करें?
आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया एक नियमित दिनचर्या पसंद करते हैं। इसलिए खाने, सोने और एक्सरसाइज का समय जितना रेगुलर होगा, गट उतना बेहतर काम करेगा।
- कब गट से जुड़ी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
गैस, कब्ज या पेट खराब होने जैसी समस्याएं कभी-कभी होना सामान्य है। लेकिन अगर ये शिकायतें लंबे समय तक बनी रहें या बार-बार लौटकर आएं, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा यदि,
- स्टूल में ब्लड दिखाई दे।
- वजन तेजी से घटे।
- पेट में लगातार दर्द रहे।
- बार-बार उल्टी हो।
- निगलने में परेशानी हो।
- लगातार ब्लोटिंग या पेट फूलने की समस्या हो।
- डेली रूटी प्रभावित होने लगे।
ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।
Disclaimer: पेट (Gut Health) के लिए यहाँ सामान्य जानकारी दी गई है, किसी भी समस्या या सुझाव के लिए विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

